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मुख्तार अंसारी को कोर्ट की अनुमति बिना पंजाब भेजने का मामला फिर गरमाया

बांदा डीवीएनए। गैंगस्टर व विधायक मुख्तार अंसारी को बांदा जेल से पंजाब भेजे जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में यूपी सरकार द्वारा दाखिल किए गए हलफनामे के बाद यह प्रकरण फिर गरमा गया है। इसमें यहां के तत्कालीन डिप्टी जेलर को निलंबित किया जा चुका है।
मुख्तार 30 मार्च 2017 को लखनऊ जेल से बांदा जेल भेजे गए थे। प्रशासनिक आधार पर शासन ने शिफ्ट किया था। लगभग 22 माह तक बांदा जेल में कड़ी सुरक्षा के बीच रहे अंसारी को 31 जनवरी 2019 को यहां से पंजाब भेज दिया गया। उन्हें पंजाब पुलिस लेने आई थी। पंजाब के मोहाली जनपद के विशेष न्यायिक प्रथम मजिस्ट्रेट का आदेश लेकर पंजाब पुलिस आई थी। इसी आदेश पर बांदा जेल अधिकारियों ने मुख्तार अंसारी को पंजाब पुलिस के हवाले कर दिया। बाद में यह मुद्दा उठा कि एमपी एमएलए कोर्ट और मुख्तार अंसारी के मुकदमों से संबंधित अदालतों के आदेश के बगैर पंजाब भेज दिया गया। जांच के बाद बांदा के तत्कालीन डिप्टी जेलर तारकेश्वर सिंह को शासन ने निलंबित कर दिया था। हालांकि, निलंबन से पहले उनका तबादला वाराणसी कर दिया गया था। वहीं निलंबन आदेश पहुंचा।
24 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में मुख्तार अंसारी से संबंधित सुनवाई थी। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दिए गए हलफनामे में यह बात भी कही गई कि बांदा जेल अधिकारियों ने अदालत की अनुमति के बगैर पंजाब भेज दिया। बांदा जेल अभिलेखों के मुताबिक, मुख्तार अंसारी पर सात हत्याएं, दो अपहरण और हत्या की कोशिश के दो मामले दर्ज थे। उधर, बांदा जेल के मौजूदा डिप्टी जेलर वीरेश्वर सिंह ने मुख्तार अंसारी के 22 माह जेल में रहने की पुष्टि की। साथ ही बताया कि मामला उनके कार्यकाल से पूर्व का है। अधीक्षक आरके सिंह कई माह से मेडिकल अवकाश पर हैं। हमीरपुर जेल अधीक्षक प्रमोद तिवारी को बांदा जेल का अतिरिक्त प्रभार मिला हुआ है।
संवाद विनोद मिश्रा

Digital Varta News Agency

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