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पुलिस महानिरीक्षक नें बताया, बच्चों से बातचीत करते समय वर्दी न पहने अधिकारी

बांदा डीवीएनए। पुलिस महानिरीक्षक के सत्यनारायणा ने चित्रकूटधाम मंडल की पुलिस से कहा है कि बच्चों और महिलाओं के संरक्षण संबंधी कानूनों का विधिवत अध्ययन करें। पुलिस की छवि को जिम्मेदार के रूप में पेश करने के लिए सक्रियता जरूरी है। बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों को बताया गया कि वह बच्चों से बातचीत करते समय वर्दी में न रहें।
पुलिस लाइन सभागार में चित्रकूटधाम मंडल स्तरीय कार्यशाला में महिला एवं बच्चों की संरक्षा और सुरक्षा में पुलिस की भूमिका को लेकर मंथन हुआ। अध्यक्षता कर रहे महानिरीक्षक ने किशोर न्याय अधिनियम 2015, पाक्सो अधिनियम 2012, बाल विवाह, मानव तस्करी इत्यादि से संबंधित जानकारियां दीं। पुलिस अधीक्षक डॉ. एसएस मीणा ने कहा कि यह कार्यशाला उनके लिए ज्ञानवर्द्धक है। बच्चों और महिलाओं से संबंधित अपराध की विवेचना में सहायता मिलेगी। एएसपी महेंद्र प्रताप चैहान ने कहा कि बाल कल्याण पुलिस अधिकारी बच्चों से बात करते समय वर्दी में नहीं रहेंगे। यूनीसेफ के अनिल कुमार ने किशोर न्याय अधिनियम, पाक्सो एक्ट की धाराओं के बारे में बताया। बच्चों से संबंधित बैड टच व गुड टच की जानकारी दी।
सहायक अभियोजन अधिकारी जीतेंद्र सिंह ने बाल विवाह निषेध अधिनियम और पुलिस की भूमिका के बारे में बताया। सहायक अभियोजन ब्रह्म मूर्ति यादव ने मानव तस्करी विरोधी इकाई की संरचना और सिद्धांतों के बारे में जानकारी दी। साथ ही मानव तस्करी रोकने के लिए गुमशुदा बच्चों को खोजने में पुलिस के सामने आने वाली चुनौतियां बताईं। कार्यशाला में समापन के अवसर पर मंडलायुक्त दिनेश कुमार सिंह भी शामिल हुए। संचालन स्कूल शिक्षिका सोनम सिंह ने किया।
संवाद विनोद मिश्रा

Digital Varta News Agency

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