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अयोध्या में शुरू राम मंदिर का निर्माण, चित्रकूट में हनुमान मंदिर पर कानूनी बवाल

बांदा। (डीवीएनए)अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का भले हीं मार्ग प्रशस्त है, पर चित्रकूट मंडल का हनुमान मंदिर का निर्माणर कथित फर्जी रजिस्ट्री के चलते दो साल से निर्माण का कार्य कानूनी शिकंजे में जकड़ा है। मामला बांदा मुख्यालय के बलखण्डीनाका पुलिस चौकी क्षेत्र का है। यहां सिंह वाहिनी देवी मंदिर के पीछे हनुमान मंदिर की फर्जी रजिस्ट्री कराकर खुद को कथित सम्पादक बताने वाले ने मामला इतना उलझा दिया कि दो साल से मंदिर का ढांचा तैयार है, पर निर्माण नहीं हो पा रहा। गजब की बात यह है कि इस हनुमान मंदिर की रजिस्ट्री के जमीनी भूअभिलेखों में गाटा संख्या का कहीं अता पता नहीं है! उधर, इस मंदिर के सौंदर्यीकरण पर तकरीबन दो लाख रूपए खर्च करने वाले मोहल्लेवासियों को अपने ईष्टदेव के चरण वंदन तक नहीं करने दिए जा रहे। कहा यह जा रहा है कि सब मामला संज्ञान के बाद भी प्रशासन न्याय नहीं करा पा रहा!
गौरतलब हो कि प्रमुख शक्तिपीठ सिंहवासिनी मंदिर के पीछे प्राचीन हनुमान मंदिर है। इस हनुमान मंदिर का निर्माण इलाकाई लोगो ने करीब 38 साल पहले वर्ष 1982 में कराया था। मंदिर निर्माण के बाद से मंदिर से धार्मिक कार्यक्रम व पूजन आदि होते रहे हैं। दो साल पहले अप्रैल 2019 में मोहल्ले के लोगों ने सार्वजनिक रूप से मंदिर निर्माण के लिए तकरीबन दो लाख रूपए की धनराशि जुटाई और मंदिर निर्माण शुरू कराया। मंदिर का पूरा ढांचा खड़ा हो गया। इसी बीच मंदिर के बगल की ससुराल में रहने वाले बनारस के विनोद सैनी पुत्र जगदेव ने मंदिर निर्माण के विरोध में अदालत से स्टे ले लिया।

प्रशासन ने निर्माण कार्य रूकवा दिया तो मंदिर निर्माण के अगुवा रहे पड़ोसी अखिलेन्द्र तिवारी पुत्र अवध नारायण ने जनसूचना के तहत मंदिर की जमीन की जानकारी मांगी।

सम्बन्धित लेखपाल अवधेश कुमार के मुताबिक मंदिर की जमीन की विनोद कुमार ने जो रजिस्ट्री कराई है उस जमीन का भू-अभिलेखों में गाटा संख्या ही नहीं है। इस जमीन पर विनोद कुमार ने बाउंड्री खिंचवाकर रजिस्ट्री करा ली है। वर्ष 2002 को इस जमीन को खरीदा गया है। अब सवाल यह उठता है कि जिस जमीन का भू-अभिलेखों में गाटा संख ही नहीं है उसे कैसे खरीदा जा सकता है। इतनी बड़ी अंधेरगर्दी के बावजूद राजस्व विभाग की चुप्पी समझ से परे है। उधर, मोहल्लेवासियों अधिवक्ता आनन्द स्वरूप पांडेय, देव स्वरूप त्रिपाठी, श्रीराम गुप्ता, राजाराम सोनकर, संजीत चैहान, कोपल सोनकर का कहना है कि जिस जमीन की फर्जी रजिस्ट्री कराई गई है उस जमीन पर हनुमान जी का प्राचीन मंदिर चार दशक पूर्व से है। इस मंदिर को भव्यता देने के लिए उसका सौन्दर्यीकरण कराया जा रहा था। मंदिर निर्माण में स्टे लगाकर काम रूकवा दिया गया है। इससे मोहल्लेवासियों की धार्मिक भावनाओं पर गहरी ठेस लगी है। इलाकाई लोग अपने आराध्य की पूजा अर्चना तक नहीं करा पा रहे हैं। उधर, आलम यह है कि देखरेख के अभाव में मंदिर में आवारा मवेशी पनाह ले रहे हैं।
संवाद , विनोद मिश्रा

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