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मुजफ्फरनगर दंगा: योगी सरकार भाजपा विधायकों पर दर्ज मुकदमा वापस लेने की तैयारी में, सपा ने साधा निशाना

लखनऊ (डीवीएनए)। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने मुजफ्फरनगर दंगों से जुड़े सबसे अहम केस को वापस लेने का फैसला किया है। इसके लिए डिस्ट्रिक्ट गवर्नमेंट काउंसल राजीव शर्मा ने मुजफ्फरनगर की एडीजे कोर्ट में अर्जी दी है। हालांकि, अभी कोर्ट ने सरकार की इस अर्जी पर फैसला नहीं सुनाया है। वैसे तो मुजफ्फरनगर दंगे में 510 मुक़दमे दाखिल हुए थे, जिसमें से यह केस काफी अहम है, क्योंकि ये वही मुकदमें हैं, जिनमें मौजूदा बीजेपी विधायक संगीत सोम, कपिलदेव अग्रवाल और कैबिनेट मंत्री सुरेश राणा समेत अन्य आरोपी हैं। यह मुकदमा इसलिए भी अहम है, क्योंकि 7 सितंबर 2013 को नगला मंदोर में जाटों की महापंचायत के बाद ही मुजफ्फरनगर समेत पश्चिम यूपी में दंगों की आग फैल गई थी, जिसमें 65 लोगों की मौत हो गई और 40 हजार से ज्यादा लोग बेघर हो गए थे। इनमें से कई लोग आज भी कैंप में रह रहे हैं। इस अर्जी पर समाजवादी पार्टी ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। सपा प्रवक्ता अनुराग भदौरिया ने एक वीडियो बयान जारी करते हुए कहा कि शायद भाजपा सरकार इसीलिए बनी थी कि आपराधिक मुकदमे जिन विधायकों पर दर्ज है वो वापस हों इससे अपराधियों का मनोबल बढ़े
दरअसल, मुजफ्फरनगर के कवाल गांव में सचिन और गौरव नाम के युवक की मुस्लिमों द्वारा पीट-पीटकर की गई हत्या के बाद नगला मंदोर में यह महापंचायत बुलाई गई थी. बाद में महापंचायत से लौट रहे लोगों पर एक समुदाय द्वारा हमला कर दिया गया था, जिसके बाद दंगा भड़क उठा. आरोप है कि इस महापंचायत में बीजेपी नेताओं ने समुदाय विशेष के खिलाफ भड़काऊ भाषण दिया था. साथ ही महापंचायत बुलाकर उस वक्त लागू धारा 144 का भी उल्लंघन किया गया था. इसके बाद शीखेड़ा थाना के इंचार्ज चरण सिंह यादव ने आगजनी, तोडफोड़ जैसी गंभीर धाराओं में बीजेपी नेताओं व अन्य के खिलाफ केस दर्ज किया था.
टेक्निकली सरकार ने मुकदमा वापस लिया
जानकारों की मानें तो टेक्निकली सरकार की तरफ से मुकदमा वापस ले लिया गया है. दरअसल, ऐसे सभी मुकदमें में आरोपी के खिलाफ राज्य सरकार लड़ती है. यह मुकदमा भी भाजपा विधायकों के खिलाफ राज्य सरकार की ओर से तत्कालीन थानाध्यक्ष चरण सिंह यादव ने दर्ज करवाया था. अब सरकारी वकील की ओर से कोर्ट में मुकदमे वापसी की अर्जी देने का अर्थ ही है कि सरकार ने यह मुकदमा वापस ले लिया है. अब कोर्ट को केस के गुण-दोष के आधार पर तय करना है कि यह मुकदमा वापस होगा या नहीं.

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