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आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा, अपने अंदर का अहंकार को मिटा दो, अपने आप ज्ञान प्राप्त हो जाएगा

बांदा। डीवीएनए

श्रीमद्भागवत गीता विश्व का ऐसा धार्मिक ग्रंथ है, जिसका एक एक श्लोक 5000 साल बाद भी प्रासंगिक है और 5000 साल बाद भी प्रासंगिक रहेगा। यह उद्गार गीता संस्थान समिति द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत गीता जयंती ज्ञान यज्ञ के अंतिम दिन श्री कल्कि पीठ से पधारे आचार्य प्रमोद कृष्णम ने श्रीमद भगवत गीता की व्याख्या करते हुए व्यक्त किया।


उन्होंने भगवान विष्णु के दशावतार की चर्चा करते हुए कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम, श्री कृष्ण और नवे अवतार बुद्ध का अवतार लेने का प्रयोजन अलग-अलग है उन्होंने महाभारत में द्रोपदी के चीरहरण प्रसंग की चर्चा करते हुए कहा कि जब द्रौपदी के चीर हरण का समय आया तो द्रौपदी ने भीष्म पितामह, युधिष्ठिर नकुल सहदेव की तरफ देखा बाद में धनुर्धारी अर्जुन से भी मदद मांगी लेकिन सभी ने नजरें झुका ली थी शायद उन्हें तब भी किसी के द्वारा द्रौपदी की लाज बचाने की आशा थी।तभी द्रोपदी ने श्री कृष्ण को पुकारा और श्री कृष्ण ने द्रौपदी की लाज बचा ली। उन्होंने कहा कि जिस तरह भगवान विष्णु के 9 अवतारों के अलग-अलग भेद हैं। उसी तरह दसवां अवतार कल्कि का कलयुग में अवतार होना है।


उन्होंने कहा कि यह धरती जहां गीता जयंती पर श्रीमद् भागवत गीता पर चर्चा हो रही है वहां मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने साढे 11 वर्ष का समय बिताया। अद्भुत संयोग है कि त्रेता में भगवान राम यहां आए थे और द्वापर के भगवान श्री कृष्ण की वाणी पर चर्चा हो रही है।और कलयुग में भगवान का जहां दसवां अवतार श्री कल्कि के रूप में होना है मैं उसी पीठ से आया हूं।
आचार्य ने कहा कि जब से सृष्टि का सृजन हो रहा है

शास्त्रों वेदों की रीत नीति, विधि विधान मे परमात्मा को पानी के लिए मनुष्य प्रयास करता है परमात्मा असीम हैअनंत है जिसका कोई अंत नहीं है तुम्हारा अंत है परमात्मा अथाह है तुम्हारी थाह है। परमात्मा को पाने के लिए मनुष्य धार्मिक ग्रंथों को पढ़ता है रटता है और उनके एक-एक श्लोक कंठस्थ करने की कोशिश करता है इसके बाद भी उन्हें न ज्ञान प्राप्त होता है और न परमात्मा के दर्शन होते हैं।


आचार्य कहा कि तुम्हारे अंदर जो अहंकार है उस अहंकार को मिटा दो तो अपने आप ज्ञान प्राप्त हो जाएगा।
संवाद, विनोद मिश्रा

Digital Varta News Agency

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