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MRI कितनी खतरनाक, क्‍या जान भी ले सकती है

MRI का मतलब है मैग्नेटिक रेसोनेंस इमेजिंग स्कैन, जिसमें लगभग डेढ घंटे का समय लगता है। ये इस बात पर निर्भर करता है कि शरीर का कौन सा, कितना बड़ा हिस्सा स्कैन किया जाना है यह एक्स रे और सीटी स्कैन से अलग है रेडिएशन के बजाए मैग्नेटिक फील्ड पर काम करता है दिमाग, घुटने, रीढ़ की हड्डी जैसे शरीर के अलग अलग हिस्सों में जहां कहीं भी सॉफ्ट टिशू होती है उनका एमआरआई स्कैन से पता लगाया जा सकता है। आम तौर पर MRI स्कैन वाले दिन आप खा-पी सकते हैं और दवाएं भी ले सकते हैं। MRI स्कैनर ताक़तवर मैग्नेटिक फ़ील्ड पैदा करता है। ऐसे में उसके भीतर जाते वक़्त शरीर पर कोई मेटल ऑब्जेक्ट नहीं होना चाहिए।

MRI के दौरान इन चीजों को रखे दूर 

सुनने की मशीन
घड़ी, हाथों में पहनने वाले कडे
ज्वेलरी जैसी नेकलेस या झुमके
नकली दांत जिनमें धातु का इस्तेमाल होता है
विग, क्योंकि कुछ में धातु के टुकड़े होते हैं

कब हो सकता है खतरा

शरीर की जांच के लिए बनी ये मशीन कई बार ख़तरनाक और जानलेवा भी साबित हो सकती है. यूं तो रूम में दाख़िल होने से पहले ये सुनिश्चित किया जाता है कि मरीज़ के पास कोई धातु की चीज़ ना हो लेकिन कई बार अनजाने में गड़बड़ी हो जाती है. अगर शरीर के भीतर कोई स्क्रू, शार्पनेल या कारतूस के हिस्से भी हैं तो ख़तरनाक साबित हो सकते हैं. धातु के ये टुकड़े मैग्नेट बेहद तेज़ गति से खींचेंगे और आपके लिए खतरनाक हो सकते हैं। स्कैनर चलने के वक्त ये पैच गर्म हो सकते हैं जिससे मरीज़ जल सकता है. स्कैन के दौरान कई बार तेज़ आवाज़ें आती हैं जो इलक्ट्रिक करंट की होती है. शोर से बचने के लिए हेडफ़ोन भी दिए जाते हैं.

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